Monday, 8 December 2008

विवश

क्या इश्वर इतना असहाय है कि वो केवल नियति और माथे कि लकीरों में वास करता है

2 comments:

हिमांशु said...

आपके इस प्रश्न में न जाने कितने उत्तर कुलबुला रहे हैं.

इस प्रविष्टि के लिए धन्यवाद .
हिमांशु

Ashutosh said...

हिमांशु भाई ,

जब इश्वर से उत्तर मिलना बंद हो जाए तो प्रश्नों का ही सहारा मात्र रह जाता है

- आशुतोष